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कांगड़ा। कुछ अरसा पहले तक पारम्परिक कृषि का बोलबाला था। किसान बैलों के साथ कृषि करते थे और लगभग हर घर में बैल पालने का रिवाज़ था। बदलते समय के साथ पारम्परिक कृषि में आधुनिक तकनीक के रंग घुलने लगे।

हल-बैल के स्थान पर ट्रैक्टर व अन्य यंत्रों का उपयोग होने लगा, खेतों से बैलों का रिस्ता टूटने लगा। कृषि कार्याें में मशीनीकरण का महत्व बढ़ गया है। कृषि यंत्रों का प्रयोग करने से किसान अपना कार्य कम मेहनत और कम समय में निपटा लेते हैं। जो कार्य एक जोड़ी हल व बैल से पूरे दिन में किया जाता है उसे एक ट्रैक्टर द्वारा लगभग एक घण्टे से भी कम समय में कर लिया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कृषि के मशीनीकरण का अर्थ भूमि पर सम्पन्न होने वाली खेतीबाडी की उन गतिविधियों से है जिनमें तमाम क्रियाओं में यांत्रिक शक्ति प्रयोग की जाती है। पहले इन सभी क्रियाओं में मानव और पशुश्रम सम्मिलित होता था।

सर्वविदित है कि कृषि यंत्रों तथा उपकरणों का मूल्य अधिक होता है इसलिए कई बार गरीब किसान इन उपकरणों को नहीं खरीद पाते। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग के माध्यम से विभिन्न कृषि-यन्त्रों तथा उपकरणों पर अनुदान दिया जाता है ताकि गरीब किसानों को किसी तरह की कठिनाई न हो और वह अपनी खेतीबाड़ी में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से वंचित न रहें।

बीस से चालीस हॉर्स पावर के ट्रेक्टर की खरीद पर सीमान्त किसानों, अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला कृषकों को 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम तीन लाख रुपये की जबकि आठ से बीस हॉर्स पावर के ट्रेक्टर पर 50 प्रतिशत या दो 25 हजार रुपये की राशि तक उपदान देने का प्रावधान है।

जिला काँगड़ा में सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकनेजीयेशन योजना के अन्तर्गत वर्ष 2019-20 में 206 किसानों को 595 लाख 50 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। आठ हॉर्स पावर से अधिक क्षमता के पावर टिल्लर पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 85 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

इसके अंतर्गत जिला में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना में गत वित्त वर्ष में चार किसानों को 3 लाख 40 हजार रूपये का उपदान दिया गया।
राज्य कृषि यन्त्रीकरण तथा सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकनेजीयेशन योजना के अंतर्गत पावर वीडर पर दी जाने वाली 50 प्रतिशत अथवा 25 हजार रुपये की सब्सिडी के तहत गतवर्ष 2019-20 में लगभग एक करोड़ की सब्सिडी देकर जिला के 405 किसानों को लाभान्वित किया गया है।

कांगड़ा के समीप गांव ढुगियारी के किसान कुशल सिंह का कहना है कि मैंने भी दो वर्ष पूर्व अपनी खेतीबाड़ी के लिए एक पावर वीडर लिया था, जिस पर मुझे सरकार द्वारा 25 हजार रूपये का उपदान मिला। उनका कहना है कि पावर वीडर के इस्तेमाल से कम समय में खेत को बीजाई के लिए तैयार करना आसान हो गया है।

पावर वीडर के साथ कार्य करना इतना सरल है कि वर्तमान में उनके घर में आई उनकी भांजी सुनयना भी धान के खेतों में पावर वीडर के साथ काम करके खेतों को तैयार करने में अपने मामा की सहायता कर रही है जोकि काँगड़ा के नज़दीक सोहड़ा की रहने वाली है और बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है।

सुनयना अपने अनुभव सांझा करते हुए बताती है कि उनके घर में पहले से ही पावर वीडर है, जिसे वह भी इस्तेमाल करती है, जबकि बैलों को जोतने का कार्य शायद वह नहीं कर पाती।

विकास खण्ड रैत की ग्राम पंचायत डोहब के राजेन्द्र कुमार का कहना है कि उन्होने दो वर्ष तक किसी और का ट्रैक्टर किराए पर लेकर अपने खेतों में खेतीबाडी की। लेकिन उनके लिए यह एक घाटे का सौदा रहा, फिर वह अपना पॉवर टिल्लर खरीदने हेतु गए। लेकिन इसका भाव अधिक होने के कारण वे इसे खरीदे बिना मायूस घर वापस लौट आए।

उसके उपरांत उनके किसी मित्र ने उद्यान विभाग द्वारा कृषि उपकरणों बारे दिए जा रहे उपदान की जानकारी दी। राजेन्द्र का कहना है कि उसके बाद उन्होने स्वंय विभागीय कार्यालय जाकर इस योजना के बारे में विस्तार से जाना और उसके लिए आवश्यक दस्तावेज की औपचारिक्ताओं को पूर्णकर आवेदन किया। विभाग द्वारा उन्हें कुछ समय पश्चात् 50 प्रतिशत उपदान स्वीकृत किया गया।

राजेन्द्र कुमार सरकार का धन्यवाद करते हुए कहते है कि वह अब आराम से अपनी खेती तो कर ही रहें है अपितु गांव के अन्य किसानों के खेत जोत कर 10 से 15 हजार रूपए कमाकर अपनी आर्थिकी भी सुदृढ़ कर रहे है।

गांव डोहब के ही एक अन्य लाभार्थी किसान श्याम प्रदेश सरकार का धन्यवाद किया और बताया कि उन्होने भी माह फरवरी 2020 में एक ट्रैक्टर लिया है, और इस पर उन्हे कृषि विभाग के माध्यम से तीन लाख रूपए का उपदान मिला।

धर्मशाला में कृषि विभाग के उत्तरी क्षेत्र के सयुंक्त निदेशक नरेन्द्र कुमार धीमान बताते हैं कि जिला काँगड़ा में वर्ष 2019-20 में लगभग 12 करोड़ की उपदान राशि देकर 36 हज़ार किसानों को लाभान्वित किया गया।

प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को विभिन्न कृषि उपकरणों के क्रय पर उपदान दिया जाता है। उनका कहना है कि जिला काँगड़ा में राज्य कृषि यंत्रीकरण तथा उत्तम चारा उत्पादन योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में 4600 किसानों को टोका मशीनों पर दो करोड़ 75 लाख रुपये का उपदान दिया गया है।

संयुक्त निदेशक कृषि के अनुसार बीजोपचार हेतु पानी के टब पर 50 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत वर्ष 2019-20 में 20 हजार किसानों को 66 लाख की उपदान राशि उपलब्ध करवाई गई।

उन्होंने जिला के किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे कृषि विभाग द्वारा चलाई गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, उत्तम किस्म के बीजों का प्रयोग तथा समय-समय पर अधिकारियों द्वारा दी गई फसल सम्बन्धी विभिन्न तरह की जानकारी व कृषि विशेषज्ञों के परामर्श का लाभ उठाकर उन्नत तकनीक के साथ अपनी कृषि पैदावार बढ़ाकर आर्थिकी सुदृढ़ कर सकते हैं।

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